गीत ग़ज़ल गुनगुनाता है तू जब भी पास होती है
नहीं कुछ भी तो भाता है तू जब भी पास होती है
मेरे बस में नहीं रहता चलाता अपनी मर्जी है
मेरा दिल मचल ही जाता है तू जब भी पास होती है
~Kumar Satendra
नहीं कुछ भी तो भाता है तू जब भी पास होती है
मेरे बस में नहीं रहता चलाता अपनी मर्जी है
मेरा दिल मचल ही जाता है तू जब भी पास होती है
~Kumar Satendra
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