Skip to main content

हजारों रोज गुज़रे हैं

हजारों रोज गुज़रे हैं हजारों रोज गुज़रेंगे
सिवा तेरे मेरे नगमे किसी से भी न सिमटेंगे
कभी आँसू कभी हँसना कभी लिखना कभी पढ़ना
जो तूने ना सम्हाले हम किसी से भी न सम्हलेंगे

   ~Kumar Satendra

Comments

Popular posts from this blog

हर पल बरसता बादल है

हर पल बरसता बादल है वो मेरे गाँव की लड़की मेरी आँखों का काजल है वो मेरे गाँव की लड़की खुद परी होके परियों का कहानी सुनती है अब भी कहूँ क्या कितनी पागल है वो मेरे गाँव की लड़की! ~Kumar Satendra

बाँट दिया

ईश्वर अल्लाह कभी रब में बाँट दिया अब कोरोना भी मज़हब में बाँट दिया ऊँचे कद पहुँच अब तूने नीचता दिखाई अंदर का सब ज़हर हम सब में बाँट दिया दाद देनी पड़ेगी हैवानियत की तेरी मतलब में कमाया मतलब में बाँट दिया तारीफ़ क्यूँ करूँ उस खुदा की खुदाई की पश्चिम से लिया "औ" पूरब में बाँट दिया ~Kumar Satendra