हजारों रोज गुज़रे हैं हजारों रोज गुज़रेंगे
सिवा तेरे मेरे नगमे किसी से भी न सिमटेंगे
कभी आँसू कभी हँसना कभी लिखना कभी पढ़ना
जो तूने ना सम्हाले हम किसी से भी न सम्हलेंगे
~Kumar Satendra
सिवा तेरे मेरे नगमे किसी से भी न सिमटेंगे
कभी आँसू कभी हँसना कभी लिखना कभी पढ़ना
जो तूने ना सम्हाले हम किसी से भी न सम्हलेंगे
~Kumar Satendra
Comments
Post a Comment