मैनें अपनो को काँटे बोते देखा है
जबकि गैरों को अपना होते देखा है
तुम सभी दरियायों की बात करते हो
मैनें समन्दर को भी सोते देखा है
रकीब कह रहा मुझसे बेवफा है वो
मैनें उसको रातों में रोते देखा है
लोग कह रहे हैं उसकी आँखों का काजल
मैनें तो ख्वाबों को भी खोते देखा है
~ Kumar Satendra
जबकि गैरों को अपना होते देखा है
तुम सभी दरियायों की बात करते हो
मैनें समन्दर को भी सोते देखा है
रकीब कह रहा मुझसे बेवफा है वो
मैनें उसको रातों में रोते देखा है
लोग कह रहे हैं उसकी आँखों का काजल
मैनें तो ख्वाबों को भी खोते देखा है
~ Kumar Satendra
Comments
Post a Comment