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मैने अपनों को काँटे बोते देखा है

मैनें अपनो को काँटे बोते देखा है
जबकि गैरों को अपना होते देखा है

तुम सभी दरियायों की बात करते हो
मैनें समन्दर को भी सोते देखा है

रकीब कह रहा मुझसे बेवफा है वो
मैनें उसको रातों में रोते देखा है

लोग कह रहे हैं उसकी आँखों का काजल
मैनें तो ख्वाबों को भी खोते देखा है

~ Kumar Satendra

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हर पल बरसता बादल है

हर पल बरसता बादल है वो मेरे गाँव की लड़की मेरी आँखों का काजल है वो मेरे गाँव की लड़की खुद परी होके परियों का कहानी सुनती है अब भी कहूँ क्या कितनी पागल है वो मेरे गाँव की लड़की! ~Kumar Satendra

बाँट दिया

ईश्वर अल्लाह कभी रब में बाँट दिया अब कोरोना भी मज़हब में बाँट दिया ऊँचे कद पहुँच अब तूने नीचता दिखाई अंदर का सब ज़हर हम सब में बाँट दिया दाद देनी पड़ेगी हैवानियत की तेरी मतलब में कमाया मतलब में बाँट दिया तारीफ़ क्यूँ करूँ उस खुदा की खुदाई की पश्चिम से लिया "औ" पूरब में बाँट दिया ~Kumar Satendra