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जो उसके साथ गुज़रा है

जो उसके साथ गुजरा है वही किस्सा सुनाता हूँ
तभी तो गीत ग़ज़लों में उसे ही गुनगुनाता हूँ
मेरे नगमे ज़माने की ज़बाँ पर इसलिए भी है
उसी को रोज लिखता हूँ उसी को रोज गाता हूँ

    ~Kumar Satendra 

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हर पल बरसता बादल है

हर पल बरसता बादल है वो मेरे गाँव की लड़की मेरी आँखों का काजल है वो मेरे गाँव की लड़की खुद परी होके परियों का कहानी सुनती है अब भी कहूँ क्या कितनी पागल है वो मेरे गाँव की लड़की! ~Kumar Satendra

बाँट दिया

ईश्वर अल्लाह कभी रब में बाँट दिया अब कोरोना भी मज़हब में बाँट दिया ऊँचे कद पहुँच अब तूने नीचता दिखाई अंदर का सब ज़हर हम सब में बाँट दिया दाद देनी पड़ेगी हैवानियत की तेरी मतलब में कमाया मतलब में बाँट दिया तारीफ़ क्यूँ करूँ उस खुदा की खुदाई की पश्चिम से लिया "औ" पूरब में बाँट दिया ~Kumar Satendra