जो उसके साथ गुजरा है वही किस्सा सुनाता हूँ
तभी तो गीत ग़ज़लों में उसे ही गुनगुनाता हूँ
मेरे नगमे ज़माने की ज़बाँ पर इसलिए भी है
उसी को रोज लिखता हूँ उसी को रोज गाता हूँ
~Kumar Satendra
तभी तो गीत ग़ज़लों में उसे ही गुनगुनाता हूँ
मेरे नगमे ज़माने की ज़बाँ पर इसलिए भी है
उसी को रोज लिखता हूँ उसी को रोज गाता हूँ
~Kumar Satendra
Comments
Post a Comment