किसी से भी ना कहती है वो मेरे गाँव की लड़की
तो बस चुप चाप रहती है वो मेरे गाँव की लड़की
कभी उलझन कभी सुलझा कभी पानी कभी सूखा
नदी बनकर के बहती है वो मेरे गाँव की लड़की!
तो बस चुप चाप रहती है वो मेरे गाँव की लड़की
कभी उलझन कभी सुलझा कभी पानी कभी सूखा
नदी बनकर के बहती है वो मेरे गाँव की लड़की!
~Kumar Satendra
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