तुमसे करूँ मै इक निवेदन
तुम मेरे गीत सजा देना
जिन अधरों से चूमा मुझको
तुम उनसे इनको गा दो ना
तुम्हारे लव छुयें इनको तो
इनकी अमर कहानी होगी
गीतों में अनुराग मिलेगा
नफ़रत पानी पानी होगी
हर लव इनको ही गायें
तुम ऐसे मधुर बना दो ना
जिन अधरों को सुनने से ही
लाखों भँवरे दिल हार गए
मेरे आवारा जीवन को
जो अधर पल में सँवार गए
उन अधरों से ही तुम इनमें
अब चारों चाँद लगा दो ना
~ Kumar Satendra
तुम मेरे गीत सजा देना
जिन अधरों से चूमा मुझको
तुम उनसे इनको गा दो ना
तुम्हारे लव छुयें इनको तो
इनकी अमर कहानी होगी
गीतों में अनुराग मिलेगा
नफ़रत पानी पानी होगी
हर लव इनको ही गायें
तुम ऐसे मधुर बना दो ना
जिन अधरों को सुनने से ही
लाखों भँवरे दिल हार गए
मेरे आवारा जीवन को
जो अधर पल में सँवार गए
उन अधरों से ही तुम इनमें
अब चारों चाँद लगा दो ना
~ Kumar Satendra
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