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तुमसे करूँ मै इक निवेदन

तुमसे करूँ मै इक निवेदन
तुम मेरे गीत सजा देना
जिन अधरों से चूमा मुझको
तुम उनसे इनको गा दो ना

तुम्हारे लव छुयें इनको तो
इनकी अमर कहानी होगी
गीतों में अनुराग मिलेगा
नफ़रत पानी पानी होगी

हर लव इनको ही गायें
तुम ऐसे मधुर बना दो ना

जिन अधरों को सुनने से ही
लाखों भँवरे दिल हार गए
मेरे आवारा जीवन को
जो अधर पल में सँवार गए

उन अधरों से ही तुम इनमें
अब चारों चाँद लगा दो ना

~ Kumar Satendra 

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बाँट दिया

ईश्वर अल्लाह कभी रब में बाँट दिया अब कोरोना भी मज़हब में बाँट दिया ऊँचे कद पहुँच अब तूने नीचता दिखाई अंदर का सब ज़हर हम सब में बाँट दिया दाद देनी पड़ेगी हैवानियत की तेरी मतलब में कमाया मतलब में बाँट दिया तारीफ़ क्यूँ करूँ उस खुदा की खुदाई की पश्चिम से लिया "औ" पूरब में बाँट दिया ~Kumar Satendra