अराजक बनते जब खादी तो आँखें रूठ जाती हैं
कहीं रूप गढ़े बरबादी तो आँखें रूठ जाती हैं
सभी है झूठे शहरों में मगर न्यायालयों में भी
जाए बढ़ झूठ की आँधी तो आँखें रूठ जाती हैं
~Kumar Satendra
कहीं रूप गढ़े बरबादी तो आँखें रूठ जाती हैं
सभी है झूठे शहरों में मगर न्यायालयों में भी
जाए बढ़ झूठ की आँधी तो आँखें रूठ जाती हैं
~Kumar Satendra
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